पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनञ्जयः|
पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः || १५ ||
पाञ्चजन्यं– पाञ्चजन्य नामक; हृषीकेशः– हृषीकेश; देवदत्तम्– दवदत्त नामक शंख; धनम्-जयः–धनञ्जय (अर्जुन धन को जीतने वाला).ने;
पौण्ड्रम्– पौण्ड्र नामक शंख; दध्मौ– बजाया; महा-शङखम्– भी्म शंख; भीम-कर्मा– अतिमानवीय कर्म करने वाले; वकृ-उदरः– (अतिभोजी) भीम ने |
भगवान कृष्ण ने अपना पाञ्चजन्य शंख बजाया, अर्जुन ने देवदत्त शंख तथा अतिभोजी एवं अतिमानवीय कार्य करने वाले भीम ने पौण्ड्र नामक शंख बजाया |
अनन्तविजयं राजा कुन्तीपत्रो युधिष्ठिरः |
नकुलः सहदेवश्र्च सुघोषमणिपुष्पकौ || १६ ||
अनन्त-विजयं– अनन्त विजय नाम का शंख; राजा– राजा; कुन्ती-पुत्रः – कुन्ती के पुत्र; युधिष्ठिरः– युधिष्ठिर;
नकुलः-नकुल; सहदेवः– सहदेव ने; च– तथा; सुघोष-मणिपुष्पकौ– सुघोष तथा मणिपुष्पक नामक शंख;
हे राजन! कुन्ती पुत्र राजा युधिष्ठिर ने अपना अनन्तविजय नामक शंख बजाया तथा नकुल और सहदेव ने सुघोष एव मणिपुष्पक शंख बजाया |

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