Friday, July 30, 2021

अध्याय एक- श्लोक 3 और 4



पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम् | 

     व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता || ३ || 


पश्य  -  देखिये;  एतम्  -  इस;  पाण्डु-पुत्राणाम  -  पाण्डु के पुत्रों  की;  आचार्य  -  हे  आचार्य  (गुरु);  महतीम्  - विशाल; चमूम्  - सेना को;  व्यूढां  -  व्यवस्तिथ;  द्रुपद-पुत्रेण  -  द्रुपद के पुत्र द्वारा;  तव  -  तुम्हारे;  शिष्येण  - शिष्य द्वारा;  धी-मता  -  अत्यन्त  बुद्धिमान  । 


हे आचार्य ! पाण्डुपत्रों  की  विशाल  सेना  को  दखे,  जिसे आपके बुद्धिमान शिष्य द्रुपद के पुत्र ने इतने कौशल से व्यवस्तिथ किया है  । 


अत्र श्रुरा महेष्वासा भीमाअर्जुनसमा युधि  | 

     युयुधानो विराटश्र्च द्रुपदश्र्च महारथः  ||  ४  || 


अत्र - यहाँ;  शूरा  -  वीर;  महा-इषु-आसाः-  महान धनुर्धर;  भीम-अर्जुन  -  भीम  तथा  अर्जुन;  समाः  - के समान;  युधि  -  युद्ध मे; युयुधानः  - युयुधान;  विराटः  -  विराट ;  च  -  भी;  द्रुपद -  द्रुपद;  -  भी;  महारथः  - महान योद्धा  ।



इस सेना मे भीम तथा अर्जुन के समान युद्ध करने वाले अनेक वीर धनुर्धर है - यथा महारथी युयुधान, विराट तथा द्रुपद  । 

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अध्याय एक - श्लोक 35 और 36

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