त इमेऽवस्थिता युद्धे प्राणांस्त्यक्त्वा धनानि च |
आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः || ३३ ||
ते– वे; इमे– ये; अवस्थिताः– स्थित; युद्ध– युद्धभमि मे; प्राणान्– जीवन को; त्यक्त्वा– त्याग कर; धनानि– धन को; च– भी;
आचार्या– गुरुजन; पितरः–पितृगण; पुत्राः– पुत्रगण; तथा– और; एव– निश्चय ही; च– भी; पितामहाः– पितामह;
मातुलाः श्र्वश्रुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा |
एतान्न हन्तुमिच्श्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन || ३४ ||
मातुलाः– मामा लोग; श्र्वशुराः– श्र्वसुर; पौत्राः– पौत्र; श्यालाः– साले; सम्बन्धिनः– सम्बन्धी; तथा– तथा;
एतान्– ये सब; न– कभी नहीं; हन्तुम– मारना; इच्श्छामि– चाहता हूँ; घ्रतः– मारे जाने पर; अपि– तो भी; मधुसूदन– हे मधु असुर को मारने वाले (कृष्ण) ।
हे मधुसूदन ! जब गुरुजन, पितृगण, पुत्रगण, पितामह, मामा, ससुर, पौत्रगण, साले तथा अन्य सारे सम्बन्धी अपना धन एवं प्राण देने के लिए तत्पर है और मेरे समक्ष खडे़ है तो फिर मैं इन सबको क्यों मारना चाहुँगा, भले ही वे मुझे क्यों न मार डाले ?

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